Sunday, 3 August 2014

Masandvaad ................SGPC Vs HSGMC




आज अखबारें भरी पढ़ी हैं HSGMC (जन्म। 2014) और SGPC (जन्म। 1925 ) की  ख़बरों  से.
बड़े बड़े न्यूज़ चैनल से ले के देसी रसाले तक इसी बात का चिंतन कर रहे हैं क गुरुद्वारों का प्रभंधन करेगा कौन?
एक बहुत ही अच्छी मिसाल दे रहा है सिख जगत, अपने श्रद्धा और भाव की । धार्मिक संस्थानों से इतना लगाव,आखिर क्यों और कैसे?  फिर जब इस सवाल को मैंने थोड़ा और टटोला तो एक चीज़ समझ आई और खुद से एक सवाल किया कि  हर गुरूद्वारे में ऐसा क्या है जिसे एक दूसरे से हथ्याने की होड़ लग गयी. तब जा क समझ आई क हर गुरूद्वारे में सांगत क इलावा एक श्री गुरु ग्रन्थ साहिब का प्रकाश होता है और माथा टेकने से पहले गोलक पढ़ी होती है। तब जा के मेरा माथा ठनका और समझ आया क गुरूद्वारे में सेवा गुरु ग्रन्थ साहिब की नहीं, बल्कि गोलक की करना चाहते हैं ये सब जथेबंदक लोग.
अगर गुरु ग्रन्थ साहिब की गरिमा की बात होती, या सेवा की बात होती तो शायद इतना बवाल ही न करते ये लोग.
अब समस्या तो समझ आ गयी, पर इस समस्या का समाधान ढूंढा भी अति-आवश्यक  है। तो मेरे हिसाब से उसके समाधान हेतु, हम संगत को, पैसों का माथा टेकना बंद करना चाहिए, क्योकि धरम का पैसे से  कोई लेन  देंन  नही, भक्ति तो अपने आप में पूर्ण होती है, उसके लिए पैसे की क्या आवश्यकता, और शक्ति जिसे ये जथेबंदियाँ  हासिल करना चाहती हैं, वो पैसे के बिना आ नहीं सकती। तो मेरी सारी संगत से विनती है क गोलक में पैसे डालने बंद करें। जिस से के ये लोभी जथेबंदक मसंद अपने लालच को किसी और तरीके से पूर्ण करने की कोशिश करें और गुरुद्वारों से दूर हटें।

पंजाब को अभी सोने चढ़े  गुम्बदों  से ज्यादा शायद स्कूल कालेज  हॉस्पिटलों और सबसे अहम नशा मुक्ति केन्द्रों की ज़रुरत है। अगर हम आज भी नहीं जागे तो पंजाब हमेशा क लिए सो जायेगा, और वो हम होने नहीं देंगे। ये हमारी चेतावनी है नेताओं को।



Post a Comment