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बहस है भड़ास है - Behas Hai Bhadaas Hai

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बहस है भड़ास है - Behas Hai Bhadaas Hai

हर तरफ जो बहस है  बहस है भड़ास है  आदमी निराश है   क्या घंटा विकास है 
जलने की आदत है  तपती हुई रेत में  तरुवर की छांव भी  लिपटी इक रेस में 
अजब सी ये प्यास है  चुबती हर सांस है  शवों की ये नगरी  लगती प्रगाढ़ है 






                                                       खून है ख़राब है  फैली बिसात है  आज मेरी बारी  तो कल तेरी रात है 
बिच्छुओं के मेले में  नाचता अकेला है वाद का विवाद है  या गहरी सी चाल है




मेरी बात सत्य है
तेरी में झोल है
सत्य ही असत्य है
अजब सा ये मेल है

रेंगती है रौशनी
तो नाचता अँधेरा है 
बहस है भड़ास है 
फैली बिसात है ||